युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो: नीति समीक्षा और संवेदनशील समाधान की आवश्यकता
- By
- Shyamlal jokchand
- June-18-2026
किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता ही देश के विकास की दिशा तय करती है। इसलिए यह आवश्यक है कि नीतियां ऐसी हों जो युवाओं को अवसर प्रदान करें, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ें और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाएं।
मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र के अनेक युवा आज विभिन्न कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में कई युवा जेलों में हैं या लंबे समय से जमानत पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियां न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती हैं, बल्कि उनके परिवारों और भविष्य की संभावनाओं पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं।
समय के साथ बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक है कि डोडाचूरा से संबंधित धारा 8/15 एवं 8/29 जैसे प्रावधानों की व्यापक समीक्षा की जाए। किसी भी कानून का उद्देश्य समाज में व्यवस्था बनाए रखना और अपराध को रोकना होता है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि युवाओं के भविष्य और पुनर्वास के अवसर प्रभावित न हों।
एक संतुलित, नियंत्रित और वैध व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे कानून का उद्देश्य भी पूरा हो और युवाओं को अनावश्यक रूप से अपराधीकरण की स्थिति का सामना न करना पड़े। नीति निर्माण में संवेदनशीलता, व्यावहारिकता और जनहित का संतुलन आवश्यक है।
आज आवश्यकता है कि युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और ऐसे समाधान तलाशे जाएं जो उन्हें शिक्षा, रोजगार और सकारात्मक जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर दें। किसी भी समाज का विकास तब संभव है जब उसके युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान मिले।
युवाओं को अवसर चाहिए, अपराधीकरण नहीं।
उनकी ऊर्जा और क्षमता को राष्ट्र निर्माण में उपयोग करना ही सबसे बड़ा समाधान है।
✍️ युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है।