समाज में बढ़ती अनैतिकता और अन्यायपूर्ण प्रवृत्तियों को लेकर श्यामलाल जी ने “कलयुगी दुशासन” जैसे आचरण पर कड़े शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार महाभारत काल में दुशासन ने नारी गरिमा और न्याय की मर्यादाओं को तार–तार किया था, उसी प्रकार आज के समय में भी कुछ तत्व समाज को उसी दिशा में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं।
श्यामलाल जी ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके नैतिक मूल्यों, न्यायप्रियता और कमजोर वर्गों के सम्मान से होती है। यदि इन मूल्यों पर आघात होता है, तो समाज का भविष्य संकट में पड़ जाता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि सामाजिक चेतना पर भी गहरा आघात करते हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सत्य, न्याय और संवेदनशीलता को अपने जीवन का आधार बनाएं और किसी भी प्रकार के अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाएं। श्यामलाल जी ने यह भी कहा कि समाज, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर ऐसे कलयुगी दुशासनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना होगा, तभी एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना संभव है।