गांव रानपुर में आंगनवाड़ी की घटना में 20 मासूम बच्चों की जान बचाते हुए शहीद हुई स्वर्गीय कंचनबाई मेघवाल के बलिदान को लेकर क्षेत्र में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। किसान नेता श्यामलाल जोकचन्द गुरुवार को रानपुर पहुंचे और शोकाकुल परिवार से मिलकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे केवल हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी बताया।
श्यामलाल जोकचन्द ने कहा कि आंगनवाड़ी परिसर में पहले से मधुमक्खियों के छत्ते मौजूद थे, लेकिन उन्हें हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। बच्चों की सुरक्षा के लिए भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। जब मधुमक्खियों के झुंड ने बच्चों पर हमला किया, तब कंचनबाई ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए तिरपाल से बच्चों को ढक लिया और खुद मधुमक्खियों के सामने खड़ी होकर मानव ढाल बन गईं। हजारों डंक सहने के बावजूद वे बच्चों को बचाती रहीं, लेकिन समय पर मदद नहीं पहुंचने से उनकी जान चली गई।
उन्होंने कहा कि घटना के दो दिन बाद भी कोई वरिष्ठ अधिकारी गांव नहीं पहुंचा और न ही मधुमक्खियों के छत्ते हटाए गए। गांव में डर का माहौल है और आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लगा हुआ है। जोकचन्द ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने कंचनबाई की बहादुरी को कमतर दिखाने की कोशिश की, जो बेहद निंदनीय है।
किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि शहीद कंचनबाई के परिवार को न्याय नहीं मिला, तो किसान और ग्रामीण आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने परिवार को आर्थिक सहायता, एक सदस्य को सरकारी नौकरी, निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, मधुमक्खी छत्तों को हटाने और कंचनबाई को राजकीय सम्मान देने की मांग की।