श्यामलाल जोकचंद - रिश्वतखोर नारकोटिक्स अधिकारी का नार्को टेस्ट कराने की मांग, जोकचन्द्र ने लिखा पत्र
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- Shyamlal jokchand
- July-20-2021
जबसे अफीम गाढ़ता का नियम लागू हुआ तब से ही यह भ्रष्टाचार निरंतर जारी है। मीडिया रिपोर्ट में ही खुलासा हुआ है कि यह अधिकारी अफीम गाढ़ता को लेकर लेब के दो दलालों के मार्फत एक किसान से 50 से 80 हजार रुपए वसूलता था। छह हजार से अधिक किसानों से 30 से 36 करोड़ रुपए एडवांस वसूल कर चुका है और 40 हजार किसानों की जांच होना बाकी है। इससे साफ है कि इन चालीस हजार किसानों से भी वसूली होनी थी और अगर इन चालीस हजार किसानों से वसूली होती तो रिश्वत का आंकड़ा 3 हजार करोड़ से अधिक होता।
जोकचन्द्र ने बताया एक वर्ष में अगर गाढ़ता के नाम पर तीन हजार करोड़ रुपए की रिश्वत ली जा रही है तो हर वर्ष कितनी रिश्वत ली जा रही है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है? जोकचन्द्र ने बताया मोदी सरकार बनने के बाद ही सन् 2016-2017 में अफीम गाढ़ता को लेकर कानून बनाया। इससे अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने का और नया रास्ता मिल गया। वर्तमान में गाढ़ता के अलावा अफीम फसल खराब होने पर, रोटावेटर चलाने के नाम पर, अफीम पट्टे बहाल करने के नाम पर, पुराने कटे हुए पट्टों को बहाल करने, मिलावट, घटिया, वाटरमिक्स पट्टों को बहाल करने, अफीम के जल्दी तौल के नाम पर, मार्फिन की कमी होने, तौल में कम, ज्यादा होने आदि मामलों में भारी रिश्वत ली जाती है।
साथ ही उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि हजारों करोड़ का घोटाला मंदसौर-नीमच जिले में उजागर हुआ है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी जांच की मांग तक नही की। जोकचन्द्र ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी को पत्र भेजकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने व पकड़े गए अधिकारी का नार्को टेस्ट करने की मांग की ताकि अभी तक आरोपी रिश्वत लेकर कहां-कहां दे रहा था, उनके नाम भी उजागर हो सके। साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। जोकचन्द्र ने यह भी मांग की कि जिन-जिन किसानों से यह रिश्वत ली है, उन्हें वापस रुपए लौटाए जाए, साथ ही अफीम गाढ़ता की अनिवार्यता भी समाप्त की जाए। जोकचन्द्र ने यह भी बताया कि अफीम किसानों की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किए, लेकिन भ्रष्टाचार को जारी रखने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार ने किसानों की एक भी मांग मंजूर नही की।
डोडाचूरा के नाम पर भी हो रही लूट :
जोकचन्द्र ने बताया कि डोडाचूरा के नाम पर भी किसानों को पुलिस फर्जी प्रकरणों में फसाकर पुलिस लूट रही है। जबकि डोडाचूरा में मार्फिन मात्रा 00.2 प्रतिशत से भी कम रहती है। लेकिन वसूली का जरिया चालू रहे, इसलिए भाजपा सरकार ने डोडाचूरा को आबकारी एक्ट से हटाकर एनडीपीएस एक्ट में डाल दिया। पहले तो सरकार डोडाचूरा खरीदने को लेकर ठेका देती थी, लेकिन अब ठेका भी समाप्त कर दिया और 2012 के बाद से ही डोडाचूरा किसानों के घरों में पड़ा-पड़ा नष्ट हो गया है। पुलिस खुद मुखबिर भेजकर किसानों को फसाने की साजिश रच रही है। सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है कि मार्फिन के आधार पर सजा दी जाए। लेकिन डोडाचूरा में मार्फिन ही नही है फिर भी फर्जी एनडीपीएस एक्ट के मामले बनाए जाकर हजारों बेगुगाह किसानों को जेलों में बंद कर रखा है। जोकचन्द्र यह भी मांग की कि डोडाचूरा को भी एनडीपीएस एक्ट से बाहर किया जाए।

